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    देश की 49 हस्तियों को देशद्रोह के मामले में फंसाने वाला वकील अब जायेगा जेल

    किसी ने सच ही कहा है कि दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला खुद ही गड्ढे में गिरता है. बिहार के मुजफ्फरपुर के एक वकील के साथ ऐसा ही कुछ होने जा रहा है. देश की 49 नामचीन हस्तियों को देशद्रोह जैसे संगीन मामले में फंसाने की साजिश रचने वाले इस वकील को ही अब जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

    देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ 49 हस्तियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखने का मामला अब एक रुप ले चुका है. इन 49 प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ अब देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलेगा. बिहार के मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने इन प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को बंद करने का आदेश दिया है. लेकिन अब मुकदमा दर्ज कराने वाले स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. देशद्रोह का झूठा केस दर्ज कराने के आरोप में अब वकील बाबू पर ही मुकदमा चलेगा.
    देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं और जय श्रीराम नारे के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए अनुराग कश्यप, मणिरत्नम, श्याम बेनेगल, रामचंद्र गुहा, शुभा मुद्गल समेत 49 हस्तियों ने इस साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी को एक खुला पत्र लिखा था. प्रधानमंत्री को खत लिखना मुजफ्फरपुर के वकील सुधीर कुमार ओझा को पसंद नहीं आया और उन्होंने इन सभी लोगों पर देशद्रोह समेत कई धाराओं के तहत तीन अक्टूबर को मुजफ्फरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज करा दी.

    प्रधानमंत्री को खत लिखने पर देशद्रोह का मामला दर्ज होने पर एक बड़ा विवाद शुरू हो गया. चारों तरफ से इसकी निंदा होने लगी. जिसके बाद पुलिस ने इस पूरे केस को ही रद्द कर देने का फैसाल लिया. केस रद्द होने के बाद अब वकील सुधीर कुमार ओझा मुश्किल में पड़ गये हैं. झूठा मुकदमा दर्ज कराने को लेकर उन पर धारा 182/211 के तहत केस दर्ज किया जायेगा. मामले की जांच कर रहे आईओ हरेराम पासवान को कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. साथ ही अदालत को भी पूरे मामले से अवगत कराने को कहा गया है.

    इस बारे में मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने कहा कि राजद्रोह का मामला बंद करने का आदेश दिया गया है. मामला बंद करने का अनुरोध प्रक्रिया के तहत अदालत को सौंपा जायेगा.  पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि आरोपियों के खिलाफ लगाये गये आरोप मनगढ़त व शरारतपूर्ण हैं.

    किसी ने सच ही कहा है कि दूसरों के लिए गड्ढा खोदने वाला खुद ही गड्ढे में गिरता है. बिहार के मुजफ्फरपुर के एक वकील के साथ ऐसा ही कुछ होने जा रहा है. देश की 49 नामचीन हस्तियों को देशद्रोह जैसे संगीन मामले में फंसाने की साजिश रचने वाले इस वकील को ही अब जेल की हवा खानी पड़ सकती है.

    देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं के खिलाफ 49 हस्तियों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला पत्र लिखने का मामला अब एक रुप ले चुका है. इन 49 प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ अब देशद्रोह का मुकदमा नहीं चलेगा. बिहार के मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने इन प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को बंद करने का आदेश दिया है. लेकिन अब मुकदमा दर्ज कराने वाले स्थानीय वकील सुधीर कुमार ओझा की मुश्किलें बढ़ गयी हैं. देशद्रोह का झूठा केस दर्ज कराने के आरोप में अब वकील बाबू पर ही मुकदमा चलेगा.
    देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं और जय श्रीराम नारे के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए अनुराग कश्यप, मणिरत्नम, श्याम बेनेगल, रामचंद्र गुहा, शुभा मुद्गल समेत 49 हस्तियों ने इस साल जुलाई में प्रधानमंत्री मोदी को एक खुला पत्र लिखा था. प्रधानमंत्री को खत लिखना मुजफ्फरपुर के वकील सुधीर कुमार ओझा को पसंद नहीं आया और उन्होंने इन सभी लोगों पर देशद्रोह समेत कई धाराओं के तहत तीन अक्टूबर को मुजफ्फरपुर के सदर थाने में एफआईआर दर्ज करा दी.

    प्रधानमंत्री को खत लिखने पर देशद्रोह का मामला दर्ज होने पर एक बड़ा विवाद शुरू हो गया. चारों तरफ से इसकी निंदा होने लगी. जिसके बाद पुलिस ने इस पूरे केस को ही रद्द कर देने का फैसाल लिया. केस रद्द होने के बाद अब वकील सुधीर कुमार ओझा मुश्किल में पड़ गये हैं. झूठा मुकदमा दर्ज कराने को लेकर उन पर धारा 182/211 के तहत केस दर्ज किया जायेगा. मामले की जांच कर रहे आईओ हरेराम पासवान को कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है. साथ ही अदालत को भी पूरे मामले से अवगत कराने को कहा गया है.

    इस बारे में मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने कहा कि राजद्रोह का मामला बंद करने का आदेश दिया गया है. मामला बंद करने का अनुरोध प्रक्रिया के तहत अदालत को सौंपा जायेगा.  पुलिस सूत्रों के मुताबिक अब तक की जांच में यह बात सामने आयी है कि आरोपियों के खिलाफ लगाये गये आरोप मनगढ़त व शरारतपूर्ण हैं.

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