कभी आरबीआई से पैसे निकालना तो कभी दूसरे देशों को दान में पैसे देना, कभी जापान से बूलेट ट्रेन के लिए उधार लेना बस यही काम बच गया है सरकार का. रेलवें निजीकरण, स्कूल कॉलेज निजीकरण, सड़के निजीकरण, लाल किला निजीकरण, एयरपोर्ट निजीकरण और अब बीपीसीएल का नम्बर. एक कहावत है ना आज मेरे मरने पर तुम मुस्कुरा रहें हो कल तुम्हारे मरने पर दूनिया मुस्कुराएगी। यही हालत है सरकार का।
सरकार पेट्रोलियम ईंधन का खुदरा कारोबार करने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव पर अगर आगे बढ़ना चाहती है तो उसे संसद की अनुमति लेनी होगी.
अधिकारियों ने कहा कि सरकार बीपीसीएल को निजी क्षेत्र की देशी-विदेशी कंपनियों को बेचने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. लेकिन इसके निजीकरण के लिए संसद की अनुमति लेने की जरूरत होगी.
जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि सरकार पेट्रोलियम ईंधन के खुदरा बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाना चाहती है ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़े. इसी के मद्देनजर सरकार बीपीसीएल में अपनी 53.3 फीसदी में से बड़ा हिस्सा किसी चुनिंदा भागीदार को बेचने का विचार कर रही है.
माना जा रहा है कि बीपीसीएल के विनिवेश से ईंधन के खुदरा बाजार में न केवल बड़ी हलचल हो सकती है बल्कि इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का एक तिहाई लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.
अभी इस बाजार में सरकारी कंपनियों का दबदबा रहा है. बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 27 सितंबर को बाजार बंद होने के समय 1.02 लाख करोड़ रुपये था. इस लिहाज से कंपनी में सिर्फ 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को 26,500 रुपये के अलावा नियंत्रण एवं बाजार प्रवेश प्रीमियम के रूप में 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक मिलेंगे.
सरकार पेट्रोलियम ईंधन का खुदरा कारोबार करने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव पर अगर आगे बढ़ना चाहती है तो उसे संसद की अनुमति लेनी होगी.
अधिकारियों ने कहा कि सरकार बीपीसीएल को निजी क्षेत्र की देशी-विदेशी कंपनियों को बेचने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. लेकिन इसके निजीकरण के लिए संसद की अनुमति लेने की जरूरत होगी.
जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि सरकार पेट्रोलियम ईंधन के खुदरा बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाना चाहती है ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़े. इसी के मद्देनजर सरकार बीपीसीएल में अपनी 53.3 फीसदी में से बड़ा हिस्सा किसी चुनिंदा भागीदार को बेचने का विचार कर रही है.
माना जा रहा है कि बीपीसीएल के विनिवेश से ईंधन के खुदरा बाजार में न केवल बड़ी हलचल हो सकती है बल्कि इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का एक तिहाई लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.
अभी इस बाजार में सरकारी कंपनियों का दबदबा रहा है. बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 27 सितंबर को बाजार बंद होने के समय 1.02 लाख करोड़ रुपये था. इस लिहाज से कंपनी में सिर्फ 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को 26,500 रुपये के अलावा नियंत्रण एवं बाजार प्रवेश प्रीमियम के रूप में 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक मिलेंगे.
कभी आरबीआई से पैसे निकालना तो कभी दूसरे देशों को दान में पैसे देना, कभी जापान से बूलेट ट्रेन के लिए उधार लेना बस यही काम बच गया है सरकार का. रेलवें निजीकरण, स्कूल कॉलेज निजीकरण, सड़के निजीकरण, लाल किला निजीकरण, एयरपोर्ट निजीकरण और अब बीपीसीएल का नम्बर. एक कहावत है ना आज मेरे मरने पर तुम मुस्कुरा रहें हो कल तुम्हारे मरने पर दूनिया मुस्कुराएगी। यही हालत है सरकार का।
सरकार पेट्रोलियम ईंधन का खुदरा कारोबार करने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव पर अगर आगे बढ़ना चाहती है तो उसे संसद की अनुमति लेनी होगी.
अधिकारियों ने कहा कि सरकार बीपीसीएल को निजी क्षेत्र की देशी-विदेशी कंपनियों को बेचने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. लेकिन इसके निजीकरण के लिए संसद की अनुमति लेने की जरूरत होगी.
जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि सरकार पेट्रोलियम ईंधन के खुदरा बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाना चाहती है ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़े. इसी के मद्देनजर सरकार बीपीसीएल में अपनी 53.3 फीसदी में से बड़ा हिस्सा किसी चुनिंदा भागीदार को बेचने का विचार कर रही है.
माना जा रहा है कि बीपीसीएल के विनिवेश से ईंधन के खुदरा बाजार में न केवल बड़ी हलचल हो सकती है बल्कि इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का एक तिहाई लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.
अभी इस बाजार में सरकारी कंपनियों का दबदबा रहा है. बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 27 सितंबर को बाजार बंद होने के समय 1.02 लाख करोड़ रुपये था. इस लिहाज से कंपनी में सिर्फ 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को 26,500 रुपये के अलावा नियंत्रण एवं बाजार प्रवेश प्रीमियम के रूप में 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक मिलेंगे.
सरकार पेट्रोलियम ईंधन का खुदरा कारोबार करने वाली देश की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी भारतीय पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (BPCL) को निजी हाथों में देने के प्रस्ताव पर अगर आगे बढ़ना चाहती है तो उसे संसद की अनुमति लेनी होगी.
अधिकारियों ने कहा कि सरकार बीपीसीएल को निजी क्षेत्र की देशी-विदेशी कंपनियों को बेचने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है. लेकिन इसके निजीकरण के लिए संसद की अनुमति लेने की जरूरत होगी.
जानकारी रखने वाले अधिकारियों ने कहा कि सरकार पेट्रोलियम ईंधन के खुदरा बाजार में बहुराष्ट्रीय कंपनियों को लाना चाहती है ताकि बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़े. इसी के मद्देनजर सरकार बीपीसीएल में अपनी 53.3 फीसदी में से बड़ा हिस्सा किसी चुनिंदा भागीदार को बेचने का विचार कर रही है.
माना जा रहा है कि बीपीसीएल के विनिवेश से ईंधन के खुदरा बाजार में न केवल बड़ी हलचल हो सकती है बल्कि इससे सरकार को चालू वित्त वर्ष में 1.05 लाख करोड़ रुपये के विनिवेश का एक तिहाई लक्ष्य हासिल करने में भी मदद मिल सकती है.
अभी इस बाजार में सरकारी कंपनियों का दबदबा रहा है. बीपीसीएल का बाजार पूंजीकरण 27 सितंबर को बाजार बंद होने के समय 1.02 लाख करोड़ रुपये था. इस लिहाज से कंपनी में सिर्फ 26 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर सरकार को 26,500 रुपये के अलावा नियंत्रण एवं बाजार प्रवेश प्रीमियम के रूप में 5,000 से 10,000 करोड़ रुपये तक मिलेंगे.

0 Comments